फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार
5/18/2026
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गाजियाबाद, 18 मई। थाना साइबर क्राइम, पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद की टीम ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड संशोधित करने वाले दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप तथा 42 फर्जी पीपीओ (पेंशन प्रपत्र ऑर्डर) और जन्म प्रमाण पत्र बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान दीपक कुमार और विकास कुमार के रूप में हुई है, जो जनपद हापुड़ के थाना धौलाना क्षेत्र के निवासी हैं। दोनों सगे भाई हैं और लंबे समय से साइबर फ्रॉड से जुड़े इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए आधार में हेरफेर
जांच में सामने आया कि यह गिरोह कूट रचित जन्म प्रमाण पत्र, एलपीजी गैस कनेक्शन दस्तावेज और सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों को जारी होने वाले पीपीओ (पेंशन प्रपत्र ऑर्डर) जैसे संवेदनशील दस्तावेजों की फर्जी प्रतियां तैयार करता था। इन दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि और पते में बदलाव कराया जाता था।
जनसेवा केंद्र की आड़ में चलता था फर्जीवाड़ा
पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वे “बालाजी जनसेवा केन्द्र” के नाम से थापर बिल्डिंग, पंचवटी तिराहे के पास एक केंद्र संचालित करते थे। यहां आने वाले लोगों से 3500 से 4000 रुपये तक लेकर उनके फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे और फिर आधार कार्ड में संशोधन कराया जाता था।
पोस्ट ऑफिस कर्मचारी की मिलीभगत
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े में एक पोस्ट ऑफिस कर्मचारी ‘कोमल’ की संलिप्तता भी है। आरोपियों के अनुसार, वे प्रत्येक आधार संशोधन के लिए उसे 250 रुपये का भुगतान करते थे। पुलिस को मिले साक्ष्यों से भी इस बात की पुष्टि हुई है। फिलहाल आरोपी कर्मचारी की तलाश जारी है।
लैपटॉप में मिले फर्जी टेम्पलेट
बरामद लैपटॉप की जांच में दिल्ली नगर निगम के जन्म प्रमाण पत्र, एलपीजी गैस एजेंसी के दस्तावेज और सेना के पेंशन प्रपत्रों के टेम्पलेट पाए गए हैं। इन टेम्पलेट्स के जरिए आरोपी हूबहू असली जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। इतना ही नहीं, वे दस्तावेजों के लिए क्यूआर कोड भी जनरेट कर देते थे, जिससे उनकी सत्यता पर संदेह कम हो सके।
पुराने मामलों के सुराग भी मिले
बरामद दस्तावेजों में मुन्नी देवी के नाम से वर्ष 1938 की एक फर्जी जन्मतिथि का प्रमाण पत्र भी शामिल है। पुलिस अब इन दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए अन्य फर्जी आधार कार्डों का पता लगाने में जुटी है।
आगे की कार्रवाई जारी
गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहन विवेचना जारी है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है और पूरे रैकेट को ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है।
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