अभिलाषाष्टक स्तोत्र (भगवान शिव की अत्यंत प्रभावशाली स्तुति )
6/23/2026
0
अभिलाषाष्टक स्तोत्र भगवान शिव की अत्यंत प्रभावशाली स्तुति मानी जाती है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं।
अभिलाषाष्टक स्तोत्र
एकं पूर्णं नित्यं सर्वाधिष्ठानमद्वयम्।
निष्कलं निर्मलं शान्तं वन्दे शिवमनामयम्॥१॥
निराभासं निराकारमोंकारार्थस्वरूपिणम्।
निर्गुणं परमं देवं वन्दे शिवमनामयम्॥२॥
न विद्यते यस्य जन्म न मृत्युर्न च बन्धनम्।
न च कारणकार्यार्थं वन्दे शिवमनामयम्॥३॥
नानारूपं तथाऽरूपं भक्तानुग्रहकारकम्।
सर्वव्यापिनमीशानं वन्दे शिवमनामयम्॥४॥
ज्ञानानन्दस्वरूपं तं योगिध्येयं सनातनम्।
विश्वस्य कारणं देवं वन्दे शिवमनामयम्॥५॥
भक्तवत्सलमत्यन्तं करुणामृतसागरम्।
संसारभयहारिणं वन्दे शिवमनामयम्॥६॥
सर्वकामप्रदं देवं सर्वसिद्धिप्रदायकम्।
सर्वपापहरं शम्भुं वन्दे शिवमनामयम्॥७॥
अभिलाषाष्टकं पुण्यं यः पठेत् श्रद्धयान्वितः।
तस्य सर्वाः समृद्धयः स्युर्भक्तिर्भवति शाश्वती॥८॥
अभिलाषाष्टक स्तोत्र की पौराणिक कथा
प्राचीन समय में एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण रहता था। वह भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन आर्थिक तंगी, पारिवारिक परेशानियों और अनेक कष्टों से घिरा हुआ था। उसने अनेक व्रत, यज्ञ और पूजा की, फिर भी उसकी इच्छाएं पूरी नहीं हो रही थीं।
एक दिन एक महान ऋषि उसके घर आए। ब्राह्मण ने अपनी व्यथा सुनाई। ऋषि ने उसे भगवान शिव के अभिलाषाष्टक स्तोत्र का प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल श्रद्धापूर्वक पाठ करने का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह स्तोत्र केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति ही नहीं करता, बल्कि मन को शांति और आत्मिक बल भी प्रदान करता है।
ब्राह्मण ने पूर्ण विश्वास के साथ लगातार 40 दिनों तक इस स्तोत्र का जप और शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। कुछ समय बाद उसके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आने लगे। उसकी आर्थिक स्थिति सुधरी, परिवार में सुख-शांति आई और समाज में उसका सम्मान बढ़ा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह हुई कि उसके मन में भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति और वैराग्य का भाव उत्पन्न हुआ।
तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा, संयम और पवित्र मन से अभिलाषाष्टक स्तोत्र का पाठ करता है, उसकी उचित और धर्मसम्मत मनोकामनाएं भगवान शिव की कृपा से पूर्ण होती हैं तथा जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
पाठ करने की विधि
सोमवार या प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव का ध्यान कर शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र अर्पित करें।
दीपक और धूप जलाकर अभिलाषाष्टक स्तोत्र का कम से कम एक बार पाठ करें।
पाठ के अंत में "ॐ नमः शिवाय" मंत्र की 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अपनी मनोकामना भगवान शिव के चरणों में समर्पित कर प्रसाद ग्रहण करें।
फलश्रुति
मान्यता है कि नियमित रूप से अभिलाषाष्टक स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से—
मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
मानसिक तनाव और भय दूर होते हैं।
परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
शिव कृपा से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
आध्यात्मिक उन्नति और अंतःकरण की शुद्धि होती है।
हर हर महादेव।
Tags
अन्य ऐप में शेयर करें


