परमा एकादशी (11 जून 2026, गुरुवार) का आध्यात्मिक महत्व
6/10/2026
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अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परमा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धर्मग्रंथों के अनुसार यह व्रत भगवान भगवान विष्णु को समर्पित है और इसके प्रभाव से पाप, दुःख, दरिद्रता तथा जीवन की अनेक बाधाएँ दूर होती हैं। श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा, जप, भजन और रात्रि जागरण करने से मनुष्य को सांसारिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति का भी मार्ग प्रशस्त होता है।
कथा का सार
प्राचीन काल में काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नामक एक धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहता था। अत्यधिक गरीबी के बावजूद दोनों धर्म और सेवा के मार्ग पर चलते रहे। एक दिन उनके घर कौण्डिन्य मुनि पधारे। ब्राह्मण दम्पति ने उनका आदर-सत्कार किया और अपनी दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा।
कौण्डिन्य मुनि ने उन्हें अधिक मास की परमा एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। मुनि के बताए अनुसार दम्पति ने श्रद्धापूर्वक व्रत और पंचरात्रि साधना की। व्रत के प्रभाव से उन्हें रहने के लिए उत्तम गृह, आजीविका और समृद्धि प्राप्त हुई। जीवनभर सुख भोगने के बाद उन्हें उत्तम लोकों की प्राप्ति हुई।
व्रत का महत्व
भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पापों का नाश और पुण्य की वृद्धि होती है।
आर्थिक संकट और दरिद्रता दूर होने की मान्यता है।
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
मोक्ष तथा उत्तम लोकों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
व्रत पारण (व्रत खोलने) की विधि
द्वादशी तिथि को पूजा स्थल पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े कर सिर के पीछे फेंकें। सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पापों के नाश की भावना करते हुए सात अंजलि जल ग्रहण करें तथा चने के सात दाने खाकर व्रत का पारण करें।
नारायण-नारायण। भगवान विष्णु की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। 🙏🌹
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