दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में गूंजा शाहदरा की वर्षों पुरानी पीड़ा का मुद्दा
1/10/2026
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दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शाहदरा विधानसभा क्षेत्र की एक बेहद गंभीर और वर्षों से लंबित समस्या को मजबूती के साथ उठाया गया। यह मामला न केवल स्थानीय नागरिकों से जुड़ा है, बल्कि दिल्ली की यातायात व्यवस्था, औद्योगिक विकास और आपातकालीन सेवाओं की सुचारू आपूर्ति से भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
शाहदरा क्षेत्र की रोड नंबर 58 और रोड नंबर 64, जो मेट्रो लाइन और फ्लाईओवर के अंडरब्रिज के नीचे से होकर गुजरती हैं, आज भी बदहाली का शिकार हैं। इन सड़कों के चौड़ीकरण और समग्र विकास का प्रस्ताव विधानसभा पटल पर रखा गया और सरकार से शीघ्र ठोस कार्रवाई की मांग की गई।
2005 से अदालतों में अटका मामला
इस लिंक रोड का विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 2005 से यह मामला न्यायालयों में लंबित चला आ रहा है। इस दौरान माननीय उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कई बार यह आश्वासन दिया गया कि सड़क का निर्माण और चौड़ीकरण शीघ्र पूरा किया जाएगा।
परंतु जमीनी हकीकत यह है कि जिस सड़क की चौड़ाई 150 फुट होनी थी, वह आज भी महज 27 फुट में सिमटी हुई है। नतीजा यह है कि यहां रोजाना भारी ट्रैफिक जाम लगता है, जिससे आम नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
एंबुलेंस और आपात सेवाओं पर भी असर
इस संकरी सड़क की सबसे गंभीर मार आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रही है। ट्रैफिक जाम के कारण एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य जरूरी सेवाओं को समय पर निकलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता अब तक बनी हुई है।
फैक्ट्री मालिकों के साथ अन्याय
सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान कई फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया गया था। उस समय फैक्ट्री मालिकों को यह भरोसा दिलाया गया था कि उन्हें या तो वैकल्पिक इंडस्ट्रियल प्लॉट दिया जाएगा या फिर उचित मुआवज़ा प्रदान किया जाएगा।
लेकिन हकीकत यह है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद न तो उन्हें इंडस्ट्रियल प्लॉट मिला और न ही वास्तविक मूल्य के अनुरूप मुआवज़ा। केवल नाममात्र का मुआवज़ा देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जबकि फैक्ट्री मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
स्पष्ट मांग: तुरंत हो कार्रवाई
विधानसभा सत्र में यह स्पष्ट मांग रखी गई कि लगभग 200 मीटर लंबी इस लिंक रोड को बिना किसी और देरी के 150 फुट चौड़ा किया जाए। साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए समग्र विकास कार्य शीघ्र शुरू हों।
इसके अलावा प्रभावित फैक्ट्री मालिकों को उनका पूरा हक़, यानी उचित मुआवज़ा और वैकल्पिक इंडस्ट्रियल प्लॉट तुरंत उपलब्ध कराया जाए, ताकि वर्षों से चले आ रहे इस अन्याय का अंत हो सके।
जनता को राहत की उम्मीद
शाहदरा क्षेत्र के लोग लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं। विधानसभा में यह मुद्दा मजबूती से उठने के बाद अब स्थानीय नागरिकों और उद्योगपतियों को उम्मीद है कि सरकार इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और ज़मीनी कार्रवाई करेगी।
यदि समय रहते इस लिंक रोड का चौड़ीकरण और पुनर्विकास किया जाता है, तो न केवल ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
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