लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के व्यापारियों, उद्यमियों और संपत्ति मालिकों को बड़ी सौगात देते हुए पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण (Family Property Transfer) से जुड़े नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब प्रदेश में पारिवारिक सदस्यों के बीच कमर्शियल और औद्योगिक संपत्तियों को सिर्फ ₹5,000 की स्टांप ड्यूटी में गिफ्ट डीड के माध्यम से ट्रांसफर किया जा सकेगा।
यह निर्णय न केवल व्यापारियों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि पारिवारिक विवादों और कानूनी उलझनों को भी काफी हद तक समाप्त करने में मददगार साबित होगा।
🏢 अब व्यापारिक संपत्ति भी शामिल, पहले थी बड़ी बाधा
अब तक उत्तर प्रदेश में यह सुविधा केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों तक सीमित थी।
व्यापारियों को अपने दुकान, फैक्ट्री, गोदाम, शोरूम या औद्योगिक यूनिट को पत्नी, बच्चों या अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम करने के लिए लाखों रुपये की स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ती थी।
👉 नए आदेश के बाद यह समस्या समाप्त हो गई है।
अब कारोबारी अपनी पीढ़ी को व्यवसाय सौंपने की प्रक्रिया को किफायती और कानूनी तरीके से पूरा कर सकेंगे।
📌 ₹5,000 वाली व्यवस्था में क्या-क्या शामिल है?
✔ गिफ्ट डीड के जरिए संपत्ति का ट्रांसफर
✔ केवल नजदीकी पारिवारिक सदस्यों के बीच लागू
✔ कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी भी शामिल
✔ भारी स्टांप ड्यूटी से पूरी तरह राहत
पहले जहाँ व्यापारिक संपत्ति के ट्रांसफर पर 5 से 7 प्रतिशत तक स्टांप शुल्क देना पड़ता था, वहीं अब यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ ₹5,000 में पूरी होगी।
⚠️ सरकार ने लगाई ये जरूरी शर्त
सरकार ने इस सुविधा के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक अहम शर्त भी रखी है—
🛑 जिस संपत्ति को ₹5,000 की रियायती स्टांप ड्यूटी पर गिफ्ट किया जाएगा, उसे कम से कम 5 वर्षों तक किसी तीसरे व्यक्ति को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि यह योजना केवल वास्तविक पारिवारिक जरूरतों के लिए ही इस्तेमाल हो।
🏛️ 1️⃣ प्रशासनिक / रजिस्ट्रेशन चार्ज
रजिस्ट्रार कार्यालय में गिफ्ट डीड पंजीकरण के दौरान
प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, स्कैनिंग व कंप्यूटर शुल्क लिया जाता है
(जिला और संपत्ति के प्रकार के अनुसार इसमें हल्का अंतर संभव है)
⚖️ 2️⃣ वकील (अधिवक्ता) की फीस
गिफ्ट डीड एक कानूनी दस्तावेज होता है, इसलिए अधिकतर लोग इसे किसी अनुभवी वकील से तैयार कराते हैं।
👉 वकील की फीस आमतौर पर
₹3,000 से ₹10,000 तक होती है
संपत्ति के मूल्य, जटिलता और दस्तावेज़ों की संख्या पर निर्भर करती है
कुछ मामलों में—
✔ फैमिली सेटलमेंट
✔ संयुक्त संपत्ति
✔ एक से अधिक वारिस
होने पर फीस थोड़ी अधिक भी हो सकती है।
➡ पहले जहाँ यही प्रक्रिया लाखों रुपये में पूरी होती थी, अब वह कुछ हजार रुपये में संभव हो गई है।
👨👩👧👦 व्यापारियों और परिवारों को क्या मिलेगा फायदा?
🔹 पीढ़ी दर पीढ़ी कारोबार सौंपना आसान
🔹 कानूनी विवादों में कमी
🔹 टैक्स और स्टांप खर्च में भारी बचत
🔹 संपत्ति के दस्तावेज़ पारदर्शी और सुरक्षित
🔹 सरकार के रिकॉर्ड में सही स्वामित्व दर्ज
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला फैमिली बिजनेस मॉडल को मजबूती देगा और उत्तर प्रदेश में व्यापारिक स्थिरता को बढ़ाएगा।
🏛️ सरकार की मंशा क्या है?
योगी सरकार का उद्देश्य है—
पारिवारिक संपत्तियों को लेकर होने वाले झगड़ों को कम करना
संपत्ति हस्तांतरण को सरल बनाना
अवैध और बेनामी लेन-देन पर रोक लगाना
व्यापारियों को प्रशासनिक राहत देना
सरकार का यह कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में भी एक मजबूत पहल माना जा रहा है।
📉 राजस्व पर असर या दीर्घकालिक लाभ?
हालाँकि कुछ लोग इसे स्टांप ड्यूटी राजस्व में कमी से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि
➡ ज्यादा लोग अब वैध तरीके से रजिस्ट्री कराएंगे
➡ अवैध सौदों में कमी आएगी
➡ भूमि और संपत्ति विवाद घटेंगे
लंबी अवधि में यह निर्णय राज्य के लिए फायदेमंद साबित होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह फैसला उत्तर प्रदेश के व्यापारियों और संपत्ति मालिकों के लिए ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है।
₹5,000 की स्टांप ड्यूटी में पारिवारिक संपत्ति ट्रांसफर की सुविधा न केवल आर्थिक राहत देती है, बल्कि सामाजिक और कानूनी स्थिरता भी सुनिश्चित करती है।
👉 यह आदेश आने वाले समय में व्यापारिक परिवारों के भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला साबित होगा।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ₹5,000 वाला यह आदेश उत्तर प्रदेश के व्यापारिक वर्ग के लिए सिर्फ आर्थिक राहत नहीं, बल्कि कानूनी सुरक्षा की गारंटी है।
प्रशासनिक शुल्क और वकील की मामूली फीस के साथ अब पारिवारिक संपत्ति का ट्रांसफर सरल, सस्ता और सुरक्षित हो गया है।


